Tuesday, February 7, 2023

हिमाचल विधानसभा के दरवाजे पर लगे खालिस्तानी बैनर, सिसोदिया ने बीजेपी को घेरा, कुमार विश्वास का भी आया बयान

- Advertisement -

इस साल हिमाचल प्रदेश में गेट टुगेदर फैसले होने हैं। इसको लेकर राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के दरवाजे पर आज तड़के Khalistani banner लगाए जाने के बाद से सरकारी मसलों की शुरुआत हो गई है। इसमें दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बीजेपी को नामजद किया है, वहीं Kumar Vishwas का भी बयान सामने आया है.

सच कहूं तो डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि पूरी बीजेपी एक गुंडे को बचाने की कोशिश कर रही है और खालिस्तानी बैनरों के साथ जमा हो गए. साथ ही कुमार विश्वास ने कहा कि देश को मेरा अग्रिम नोटिस याद रखना चाहिए। मैंने पंजाब की घड़ी में कहा था, लेकिन वर्तमान में वह इस दूसरे राज्य की जांच कर रहे हैं।

- Advertisement -

मनीष सिसोदिया का बीजेपी पर हमला

आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब पार्टी के दरवाजे पर Khalistani banner लगे मिले। राज्य में भाजपा द्वारा संचालित जय राम ठाकुर का प्रशासन है। इस पर दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने इस पर निशाना साधते हुए कहा। कि जो पब्लिक अथॉरिटी भीड़ को नहीं बचा सकी, वह लोगों को कैसे बचा सकती है। इसमें हिमाचल का अब्रू शामिल है, इसमें देश की सुरक्षा शामिल है, बीजेपी सरकार पूरी तरह से फीकी पड़ गई है

- Advertisement -

पंजाब की दौड़ के दौरान कुमार ने क्या कहा?

पंजाब विधानसभा की दौड़ के दौरान, आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और लेखक Kumar Vishwas ने जोर देकर कहा था कि अरविंद केजरीवाल ने उन्हें बताया था कि एक दिन वह पंजाब के मुख्यमंत्री या एक स्वायत्त देश (खालिस्तान) के प्रधान मंत्री बनेंगे। इसके बाद एक टन हंगामा हुआ। बहरहाल: इस घोषणा के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुमार विश्वास को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी थी.

खालिस्तान भारत और पाकिस्तान में एक पंजाबी सिख बसा हुआ स्वतंत्र राज्य है। खालिस्तान आंदोलन ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद शुरू हुआ, जो भारतीय सेना द्वारा हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) पर हमला था, जहां आतंकवादी अपने परिवारों के साथ छिपे हुए थे। यह ऑपरेशन पंजाब में शांति और स्थिरता लाने के लिए चलाया गया था लेकिन इसमें कई नागरिक हताहत हुए थे और सभी आतंकवादी मारे नहीं गए थे। नतीजतन: उनमें से ज्यादातर भारत से भाग गए और पाकिस्तान में शिविर बनाए। हालांकि बाद में आतंकवाद में गिरावट आई क्योंकि कुछ आतंकवादी समूहों, जैसे बब्बर खालसा और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन ने भारतीय प्रधान मंत्री राजीव गांधी के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद हथियार डाल दिए।

- Advertisement -

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

1,000FansLike
1,010FollowersFollow
500FollowersFollow

Latest Articles